Shani Chalisa PDF | शनि चालीसा पीडीऍफ़

बहुत से लोगों की Shani Chalisa PDF | शनि चालीसा पीडीऍफ़ की डिमांड थी. लोगों ने हमें ईमेल और कमेंट के माध्यम से Shani Chalisa PDF | शनि चालीसा पीडीऍफ़ फाइल की मांग की थी.

आज के इस पोस्ट में हम शनि चालीसा को पीडीऍफ़ फाइल में डाउनलोड करने के लिए उपलब्द्ध करवा रहें हैं. आप शनि चालीसा को पीडीऍफ़ फाइल में आसानी से इस पोस्ट में डाउनलोड कर पायेंगे.

आप श्री शनि चालीसा पीडीऍफ़ फाइल को डाउनलोड करके अपने डिवाइस में रख सकतें हैं. और सम्पूर्ण श्रद्धापूर्वक श्री शनि चालीसा का पथ कर सकतें हैं.

आप सबको शनि चालीसा को डाउनलोड करने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी.

Shani Chalisa PDF

Shani Chalisa PDF
Shani Chalisa PDF

शनि चालीसा पीडीऍफ़ फाइल निचे दिया गया है. आप इस पीडीऍफ़ फाइल को आसानी से डाउनलोड पर पायेंगे. डाउनलोड कर बहुत ही साधारण और आसान प्रक्रिया हमने रखा हुआ है.

अगर आप श्री शनि चालीसा पीडीऍफ़ फाइल को डाउनलोड करना चाहतें हैं तो आपको सिर्फ दिए गए पीडीऍफ़ फाइल के सामने का डाउनलोड बटन दबाना है.

बस डाउनलोड बटन दबातें हैं श्री शनि चालीसा अपने आप डाउनलोड हो जायेगी. आपको पीडीऍफ़ फाइल डाउनलोड होते हुए दिखेगी.

यह पीडीऍफ़ फाइल मात्र 100 kb की है जो की मात्र कुछ सेकंड में ही डाउनलोड हो जायेगी.

तो बस डाउनलोड बटन को दबाएँ और श्री शनि चालीसा अपने आप डाउनलोड होकर सेव हो जायेगी. आप जब चाहें श्रद्धापूर्वक श्री शनि चालीसा का पाठ कर सकतें हैं.

अगर आपको किसी भी प्रकार की कोई भी परेशानी हो इस पीडीऍफ़ फाइल को डाउनलोड करने में या फिर इस पीडीऍफ़ फाइल पढने में तो आप हमें कमेंट में लिख सकतें हैं.

वैसे हम इस पोस्ट में भी शनि चालीसा दे रहें हैं. आप चाहें तो यहीं इस पोस्ट से श्री शनि चालीसा का पाठ कर सकतें हैं.

Shani Chalisa | शनि चालीसा

Shri Shani Chalisa | श्री शनि चालीसा

॥दोहा॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।

दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

॥चौपाई॥

जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ॥

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परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमके ॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं अरिहिं संहारा ॥

पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन ॥

सौरी, मन्द, शनि, दशनामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ॥

जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । रंकहुं राव करैं क्षण माहीं ॥

पर्वतहू तृण होई निहारत । तृणहू को पर्वत करि डारत ॥

राज मिलत वन रामहिं दीन्हो । कैकेइहुं की मति हरि लीन्हो ॥

बनहूं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चतुराई ॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा । मचिगा दल में हाहाकारा ॥

रावण की गति मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ॥

दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ॥

हार नौलाखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ॥

विनय राग दीपक महँ कीन्हों । तब प्रसन्न प्रभु हवै सुख दीन्हों ॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ॥

तैसे नल पर दशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ॥

श्री शंकरहि गहयो जब जाई । पार्वती को सती कराई ॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रोपदी होति उधारी ॥

कौरव के भी गति मति मारयो । युद्ध महाभारत करि डारयो ॥

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ॥

शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ई ॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी । सो फल ज्योतिष कहत पुकारी ॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै ॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा । गर्दभ सिंद्धकर राज समाजा ॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्राण संहारै ॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ॥

तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चाँजी अरु तामा ॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ॥

समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्वसुख मंगल कारी ॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ॥

अदभुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ॥

॥दोहा॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ॥

भगवान श्री शनि देव की आराधना और स्तुति करना अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी होता है. शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए आप हमेशा सही कर्म करें.

शनि देव की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी.

आज के इस पोस्ट में बस इतना ही.

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