Shukravar Aarti : Friday Aarti : शुक्रवार व्रत की आरती

Shukravar Aarti : Friday Aarti : शुक्रवार व्रत की आरती | Shukravar Vrat Ki Aarti : शुक्रवार के दिन की बहुत ही पवित्र दिन माना गया है. इस दिन माँ संतोषी का व्रत और आरती करना बहुत ही शुभ माना जाता है.

इसके अलावा शुक्रवार के दिन को माँ दुर्गा और उनके रूपों की स्तुति और आराधना करने का भी दिन माना गया है. इस दिन माँ दुर्गा और माँ दुर्गा के रूपों का ध्यान और स्तुति- आराधना करना बहुत ही शुभ होता है.

शुक्रवार के दिन को शुक्र ग्रह की स्तुति और आराधना करने का भी दिन माना जाता है.

इस अंक में आपको दो आरती मिलेगी. दोनों ही आरती बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ फलदायक है. माँ संतोषी की आराधना के लिए आप दूसरी वाली आरती का गायन करें.

Shukravar Aarti : Friday Aarti

|| आरती लक्ष्मण बालजती की ||

आरती लक्ष्मण बालजती की |
असुर संहारन प्राणपति की ||

जगमग ज्योति अवधपुर राजे |
शेषाचल पै आप विराजे ||

घंटा ताल पखावज बाजे |
कोटि देव मुनि आरती साजे ||

किरीट मुकुट कर धनुष विराजे |
तीन लोक जाकी शोभा राजे ||

कंचन थार कपूर सुहाई |
आरती करत सुमित्रा माई ||

आरती कीजे हरी की तैसी |
ध्रुव प्रहलाद विभीषण जैसी ||

प्रेम मगन होय आरती गावै |
बसि वैकुण्ठ बहुरि नहीं आवै ||

भक्ति हेतु हरि ध्यान लगावै |
जन घनश्याम परमपद पावै ||

शुक्रवार व्रत की आरती | Shukravar Vrat Ki Aarti

|| जय संतोषी माता मैया जय संतोषी माता ||

जय संतोषी माता मैया जय संतोषी माता |
अपने सेवक जन को सुख सम्पत्ति दाता ||

सुन्दर चीर सुनहरी माँ, धारण कीन्हों |
हीरा पन्ना दमके, तन श्रंगार लीन्हों ||

गेरु लाल घटा छवि, बदन कमल सोहे |
मन्द हँसत करुणामयी, त्रिभुवन मन मोहे ||

स्वर्ण सिंहासन बैठी, चँवर ढूरे प्यारे |
धुप, दीप, मधुमेवा, भोग धरे न्यारे ||

गुड़ अरु चना परम प्रिय, तामे संतोष कियो |
संतोषी कहलाई, भक्त्तन वैभव दियो ||

शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही |
भक्त्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही ||

मन्दिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई |
विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई ||

भक्त्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै |
जो मन बसै हमारे, इच्छा फल दीजै ||

दुखी, दरिद्री, रोगी, संकट मुक्त किए |
बहु धन – धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए ||

ध्यान धर्यो जो नर तेरो, मनवांछित फल पायो |
पूजा कथा श्रवणकर, घर आंनद आयो ||

और पढ़ें …….

Shukravar Aarti Lyrics : Friday Aarti Lyrics

Aarti Lakshman Baljati Ki,
Asur Sanharan Pranpati Ki.

Jagmag Jyoti Avadhpur Raje,
Sheshachal Pe Aap Viraje.

Ghanta Tal Pakhavaj Baje,
Koti Dev Muni Aarti Saje.

Kirit Mukut Kar Dhanush Viraje,
Tin Lok Jaki Shobha Raje.

Kanchan Thar Kapoor Suhai,
Aarti Karat Sumitra Maayi.

Aarti Kije Hari Ki Taisi,
Dhruv Prahalad Vibhishan Jaisi.

Prem Magan Hoy Aarti Gave,
Basi Vaikunth Bahuri Nahi Aawe.

Bhakti Hetu Hari Dhyan Lagawe,
Jan Ghanshyam Parampad Pawe.

Lyrics : लिरिक्स

Jai Santoshi Mata Maiya Jai Santoshi Mata.
Apne Sevak Jan Ko Sukh Sampati Data.

Sundar Cheer Sunahari Maa, Dharan Kinho.
Hira Panna Damke, Tan Shringar Linho.

Geru Lal Ghata Chavi, Badan Kamal Sohe.
Mand Hasat karunamayi, Tribhuvan Man Mohe.

Swarn Sinhasan Baithi, Chanvar Dhure Pyare.
Dhup Deep Madhumeva Bhog Dhare Nyare.

Gur Aru Chana Param Priya, Tame Santosh Kiyo.
Santoshi Kahlaayi, Bhaktan Vaibhav Diyo.

Shukravar Priya Manat, Aaj Divas Sohi.
Bhakt Mandali Chhayi, Katha Sunat Mohi.

Mandir Jagmag Jyoti, Mangal Dhwani Chayi.
Vinay Karen Ham Balak, Charnan Sir Nayi.

Bhakti Bhavmayi Pooja Angikrit Kije.
Jo Man Base Hamare, Ichacha Phal Dije.

Dukhi, Daridri,Rogi,Sankat Mukt Kiye.
Bahu Dhan – Dhanya Bhare Ghar, Sukh Soubhagya Diye.

Dhyan Dharyo Jo Nar Tero, Manwanchit Phal Paayo.
Pooja Katha Shrwan Kar, Ghar Aanand Aayo.

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