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Aadinath Chalisa | श्री आदिनाथ चालीसा | हिंदी | English | Lyrics | Download

Aadinath Chalisa | श्री आदिनाथ चालीसा जैन धर्म में आराधना का एक बहुत ही महत्वपूर्ण माध्यम है. यह चालीसा जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी को समर्पित है.

ऋषभदेव जी की आदिनाथ भी कहा जाता है. वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर थे.

तीर्थंकर का अर्थ होता है. जो तीर्थ की रचना करे. जो संसार सागर ( जीवन मरण ) के चक्र से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करे उसे तीर्थंकर कहतें हैं.

भगवान श्री ऋषभदेव का जन्म भारत के उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था. उनके पिता का नाम महाराज नाभिराय था.

उनकी माता का नाम महारानी मरूदेवी था.

भगवान श्री ऋषभदेव जी का जन्म इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय वर्ण में हुआ था.

श्री ऋषभदेव जी की बहुत ही विशाल प्रतिमा महाराष्ट्र के मांगी तुंगी नामक जगह पर स्थापित है. यह प्रतिमा 108 फीट ऊँची है.

भगवान श्री ऋषभदेव जी की एक प्रतिमा बावनगजा नामक स्थान पर स्थित है. यह स्थान मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में है. इस प्रतिमा की ऊंचाई 84 फीट है.

इस अंक में आप लोगों को Aadinath Chalisa \ श्री आदिनाथ चालीसा हिंदी और इंग्लिश में मिलेगी. आप इस चालीसा को डाउनलोड भी कर सकतें हैं.

Aadinath Chalisa

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भगवान श्री आदिनाथ जी चालीसा

|| दोहा ||

शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन को, करुं प्रणाम |
उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी नाम ||
सर्व साधु और सरस्वती जिन मन्दिर सुखकार |
आदिनाथ भगवान को मन मन्दिर में धार ||

|| चौपाई ||

जै जै आदिनाथ जिन स्वामी,
तीनकाल तिहूं जग में नामी |
वेष दिगम्बर धार रहे हो,
कर्मों को तुम मार रहे हो ||

हो सर्वज्ञ बात सब जानो
सारी दुनियां को पहचानो |
नगर अयोध्या जो कहलाये,
राजा नाभिराज बतलाये ||

मरुदेवी माता के उदर से,
चैत वदी नवमी को जन्मे |
तुमने जग को ज्ञान सिखाया,
कर्मभूमी का बीज उपाया ||

कल्पवृक्ष जब लगे बिछरने,
जनता आई दुखड़ा कहने |
सब का संशय तभी भगाया,
सूर्य चन्द्र का ज्ञान कराया ||

खेती करना भी सिखलाया,
न्याय दण्ड आदिक समझाया |
तुमने राज किया नीति का,
सबक आपसे जग ने सीखा ||

पुत्र आपका भरत बताया,
चक्रवर्ती जग में कहलाया |
बाहुबली जो पुत्र तुम्हारे,
भरत से पहले मोक्ष सिधारे ||

सुता आपकी दो बतलाई,
ब्राह्मी और सुन्दरी कहलाई |
उनको भी विद्या सिखलाई,
अक्षर और गिनती बतलाई ||

एक दिन राजसभा के अन्दर,
एक अप्सरा नाच रही थी |
आयु उसकी बहुत अल्प थी,
इसीलिए आगे नहीं नाच रही थी ||

विलय हो गया उसका सत्वर,
झट आया वैराग्य उमड़कर |
बेटों को झट पास बुलाया,
राज पाट सब में बंटवाया ||

छोड़ सभी झंझट संसारी,
वन जाने की करी तैयारी |
राव (राजा) हजारों साथ सिधाए,
राजपाट तज वन को धाये ||

लेकिन जब तुमने तप किना,
सबने अपना रस्ता लीना |
वेष दिगम्बर तजकर सबने,
छाल आदि के कपड़े पहने ||

भूख प्यास से जब घबराये,
फल आदिक खा भूख मिटाये |
तीन सौ त्रेसठ धर्म फैलाये,
जो अब दुनियां में दिखलाये ||

छैः महीने तक ध्यान लगाये,
फिर भोजन करने को धाये |
भोजन विधि जाने नहिं कोय,
कैसे प्रभु का भोजन होय ||

इसी तरह बस चलते चलते,
छः महीने भोजन बिन बीते |
नगर हस्तिनापुर में आये,
राजा सोम श्रेयांस बताए ||

याद तभी पिछला भव आया,
तुमको फौरन ही पड़धाया |
रस गन्ने का तुमने पाया,
दुनिया को उपदेश सुनाया ||

तप कर केवल ज्ञान पाया,
मोक्ष गए सब जग हर्षाया |
अतिशय युक्त तुम्हारा मन्दिर,
चांदखेड़ी भंवरे के अन्दर ||

उसका यह अतिशय बतलाया,
कष्ट क्लेश का होय सफाया |
मानतुंग पर दया दिखाई,
जंजीरें सब काट गिराई ||

राजसभा में मान बढ़ाया,
जैन धर्म जग में फैलाया |
मुझ पर भी महिमा दिखलाओ,
कष्ट भक्त का दूर भगाओ ||

|| सोरठा ||

पाठ करे चालीस दिन, नित चालीस ही बार |
चांदखेड़ी में आय के, खेवे धूप अपार ||
जन्म दरिद्री होय जो, ; होय कुबेर समान |
नाम वंश जग में चले, जिनके नहीं सन्तान ||

Bhagwan Shri Aadinath Chalisa in English Lyrics

aadinath chalisa
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~Doha ~

Shish nawa Arihant ko, Siddhan ko, karu pranam.
Upadhyay aachaary ka le sukhkari nam.

Sarv saadhu aur saraswati jin mandir sukhkar.
Aadinath bhagwan ko man mandir me dhar.

~ Chaupai ~

Jai Jai Aadinath jin swami,
Tinkal tihun jag me naami.
Wesh Digambar dhar rahe ho,
Karmo ko tum maar rahe ho.

Ho sarwagyn bath sab jaano,
Sari duniya ko pahchano.
Nagar Ayodhya jo kahlaaye,
Raja Nabhiraj batlaaye.

Marudevi Mata ke udar se,
Chait wadi Nawmi ko janme.
Tumne jag ko gyan sikhaya,
Karmbhumi ka beej upaya.

Kalpbriksh jab lage bicharne,
Janta aai dukhda kahne.
Sab ka sanshay tabhi bhagaya,
Surya Chandra ka gyan karaya.

Kheti karna bhi sikhlaya,
Nyay dand aadik samjhaya.
Tumne raj kiya neeti ka,
Sabak aapse jag ne sikha.

Putra aapka Bharat bataya,
Chakrawarti jag me kahlaya.
Bahubali jo putra tumhaare,
Bharat se pahle moksh sidhaare.

Suta aapki do batlayi,
Brahmi aur Sundari kahlayi.
Unko bhi widdya sikhlayi,
Akshar aur ginti batlayi.

Ek din rajsabha ke andar,
Ek apsara nach rahi thi.
Aayu uski bahut alp thi,
Isliye aage nahi nach rahi thi.

Wilay ho gaya uska satwar,
Jhat aaya wairagya umadkar.
Beton ko jhat paas bulaya,
Raj pat sab me bantwaya.

Chhod sabhi jhanjhat sansari,
Wan jane ki kari taiyaari.
Raw ( Raja ) hajaaron sath sidhaye,
Rajpat taj wan ko dhaye.

Lekin jab tumne tap kina,
Sabne apna rasta line.
Wesh Digambar tajkar sabne,
Chhal aadi ke kapde pahne.

Bhukh pyaas se jab ghabraaye,
Phal aadik kha bhukh mitaye.
Tin saun tresath dharm phailaaye,
Jo ab duniya me dikhlaaye.

Chhah mahine tak dhyan lagaye,
Phir bhojan karne ko dhaye.
Bhojan widhi jane nahi koy,
Kaise prabhu ka bhojan hoy.

Isi tarah bas chalte chalte,
Chhah mahine bhojan bin bite.
Nagar Hastinapur me aaye,
Raja som shreyaans bataye.

Yad tabhi pichla bhaw aaya,
Tumko phouran hi paddhaya.
ras ganne ka tumne paya,
Duniya ko updesh sunaya.

Tap kar kewal gyan paya,
Moksh gaye sab jag harshaya.
Atishay yukt tumhara mandir,
Chandkhedi bhanwre ke andar.

Uska yah atishay batlaya,
Kasht klesh ka hoy safaya.
Maantung par daya dikhai,
Janjire sab kaat giraayi.

Rajsabha me maan badhaya,
Jain Dharm jag me phailaya.
Mujh par bhi mahima dikhlao,
Kasht bhakt ka dur bhagao.

~ Sortha ~

Path kare chalis din, nit chalis hi bar.
Chandkhedi me aay ke, khewe dhoop apar.

Janam daridri hoy jo, hoy kuber saman.
Naam wansh jag me chale, Jinke nahi santan.

भगवान श्री आदिनाथ चालीसा डाउनलोड

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